मौन में बात...

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Saturday, July 19, 2008

”दया बाई" उर्फ Mercy Mathew को सलाम...

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आज ही सुबह-सुबह दूरदर्शन पर एक documentary देख रहा था जो ’दया बाई’(mercy Mathew) पर थी।उन्हीं के संबंध में लिखने की इच्छा हो आई। सो कुछ जानक...
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Thursday, July 10, 2008

’अबाबील...’- कहानी

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'तुम अगर कहो तो मैं तुम्हें एक बार और प्यार करने की कोशिश करुगाँ, फिर से,शुरु से। तुम्हें वो गाहे-बगाहे आँखों के मिलने की टीस भी दूगां। ...
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Thursday, July 3, 2008

एक मरता हुआ आदमी ’थियेटर’...

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अभी कुछ ही दिन पहले किसी दिल्ली के हिन्दी अख़बार के किसी पत्रकार ने मेरा इन्टरव्यूह लिया, और वही बासी सवाल, जिनके जवाब देते देते लगभग हर नाटक...
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Sunday, June 22, 2008

विमल को खत..

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दोस्त विमल, तुम्हारा कमेन्ट पढ़ा, चूकि पहले मैं भी कुछ ऎसा ही सोचता था सो वो बातें बहुत कुछ अपनी सी लगी, परंतु मेरे विचार इस संदर्भ में कुछ ब...
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Saturday, June 21, 2008

हबीब साहब...

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जब हम उनके घर पहुचे तो वो सो रहे थे.. हम सब शांत उनके घर में चुपचाप अपनी-अपनी जगह खोजने लगे,मानो गुरु के घर में बहुत से छोटे बच्चे आ गये हो।...
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Thursday, June 19, 2008

चिड़ीखो....

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चिड़ीखों भोपाल के पास एक बहुत सुंदर जगह... भोपाल से करीब दो धंटे की दूरी पर...(ब्यावरा रोड़)
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Tuesday, June 10, 2008

writing...

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देर से वही... वैसी ही सांसे ले रहा था।एक पैर सांसों की गति से हिल रहा था।आँखें दीवार पर टिकी थी। बचे रह गए चरित्रों में कहानियाँ ढूंढ रहा था...
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परिचय

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मानव
मेरा कोई स्वार्थ नहीं, न किसी से बैर, न मित्रता। प्रत्येक 'तुम्हारे' के लिए, हर 'उसकी' सेवा करता। मैं हूँ जैसे- चौराहे के किनारे पेड़ के तने से उदासीन वैज्ञानिक सा लेटर-बाक्स लटका। -विपिन कुमार अग्रवाल
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