मौन में बात...

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Friday, February 29, 2008

'book'

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The HOPI, an Indian tribe, have a language as sophisticated as ours, but no tenses for past, present and future. The division does not exist...
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'इल्हाम'

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'इल्हाम' नाटक का प्रयोग है, दिल्ली में.. श्रीराम सेंटर, मंडि हाऊस, २ मार्च... ७.३० बजे, शाम को.. अगर आप दिल्ली में हैं तो कृप्या ये ...
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Thursday, February 28, 2008

अपने से...

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आज एक करीब बारह या पंद्रह साल की लड़की को सड़क पार करते हुए देखा, वो अपनी माँ के साथ थी... माँ उसका हाथ पकड़कर उसे सड़क पार करवा रही थी।जिस तरह ...
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Tuesday, February 26, 2008

अपने से...

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कल रात नींद आँखो में आ जा रही थी, बाकी बची देह सो चुकी थी। मैं अपने आज के बीते हुए दिन के बारे में सोच रहा था।थोड़ा कहीं बीच में जी लिया, कही...
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Monday, February 25, 2008

रात के साथ...

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page-4 जब मैं अपने उन दिनों के बारे में कभी-कभी सोचता हूँ, जब मैं बीमार नहीं था, तो काफी अजीब लगता है... अब तो ये भी लगने लगा है कि जैसे मैं...
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Saturday, February 23, 2008

रात के साथ...

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page-3 अभी तक कोई coffee वाला नहीं दिखा... खार स्टेशन पास ही है.. चाय पी लू जाकर.. नहीं।पीडा को अगर उसकी पूरी सम्पूर्णता से जीना है तो रुकना...
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Friday, February 22, 2008

अंतिमा...

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मैंने अपने उपन्यास में कहीं लिखा है.. 'बचपन के खेल से लेकर बडे़ होने के दुख तक' ...उपन्यास की reading के दौरांन मैंने ये वाक्य पढा औ...
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परिचय

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मानव
मेरा कोई स्वार्थ नहीं, न किसी से बैर, न मित्रता। प्रत्येक 'तुम्हारे' के लिए, हर 'उसकी' सेवा करता। मैं हूँ जैसे- चौराहे के किनारे पेड़ के तने से उदासीन वैज्ञानिक सा लेटर-बाक्स लटका। -विपिन कुमार अग्रवाल
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