मौन में बात...

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Saturday, February 27, 2010

नक़ल नवीस...

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चलते-चलते पिंड़लीयों में दर्द होने लगता है... कहीं रुक जाने पर, सो जाने पर भी जब वह दर्द नहीं गया तो मैंने पैरों को मरोड़ना-तोड़ना शुरु कर द...
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Tuesday, December 29, 2009

डायरी सी कुछ....

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29th dec, 2009.. pondicherry, अलस्य सुबह... वह- आओ चलो खेलते है? मैं- क्या खेलेगें? वह- अरे! तुम्हें तो खेलना अच्छा लगता है...
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डायरी सी कुछ....

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26 th dec, 2009. वीना पानी....-’यहाँ से बाहर जाकर नाटक करने में एक अजीब सी थकान होती है, मुझे बिलकुल अच्छा नहीं लगता, ना ही मेरे ग्रुप को...

डायरी सी कुछ....

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25 th dec,2009. जल्द ही Pondicherry पहुच गया... दिन इस खूबसूरत जगह को देखने में चला गया... काश यहाँ मैं अकेला होता.. शांत.. बिना हिसाब कि...
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Saturday, December 12, 2009

मेरे ना पढ़ने के लिए....

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मेरे नाटक पढ़ने के लिए...... http://manavplays.blogspot.com/
Friday, August 28, 2009

अलस्य सुबह... (डायरी..)

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18 th August.09, अलस्य सुबह दिल्ली में, होस्टल में हूँ। आज से workshop start है। my back is gone completely… anyways we’ll see. कल काफ्...
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अलस्य सुबह... (डायरी..)

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15 th August.09, अलस्य सुबह, निकल जाने की इच्छा है, कल   Arena - The Orson Welles Story देखी…. बहुत उमदा थी। उसने अंत में कहा था कि “(I h...
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परिचय

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मानव
मेरा कोई स्वार्थ नहीं, न किसी से बैर, न मित्रता। प्रत्येक 'तुम्हारे' के लिए, हर 'उसकी' सेवा करता। मैं हूँ जैसे- चौराहे के किनारे पेड़ के तने से उदासीन वैज्ञानिक सा लेटर-बाक्स लटका। -विपिन कुमार अग्रवाल
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